खबर अभी अभी आयी है कि पूरी दुनिया कर रहा है इंतज़ार बाप बेटे कि लड़ाई का। जी हम नहीं कह रहे है सोशल साइट्स के दीवानो और मस्तानो ने तो जैसे कसम खा रखी है कि क्रिकेट को भी बॉर्डर कि लड़ाई के जैसे ही लड़ेंगे। तो ये बात अब इतनी बार फेसबुक और व्हाट्सअप, ट्विटर पे देख चूका हु कि अब मैंने भी मान लिया कि इंडिया, पाकिस्तान बांग्लादेश का रिश्ता बाप बेटे और पोते का है। अगर हम झूठ कह रहे है तो इंग्लैंड से ही पूछ लीजिये उनके इंटरव्यू में जब हार का कारण पूछा गया तो कप्तान साहब ने क्लियर कर दिया कि हम फ़ैमिली के बीच दीवार नहीं बनना चाहते थे। इस बात कि सबने तारीफ़ कि इंग्लैंड कि में भी खुश हुआ इंग्लैंड कि महानता को देख कर कि वाह क्या बात है पश्चिमी विचारधारा भी संस्कार और अनुशासन का पालन करती है । लेकिन फिर मेरे अंतरमन में एक बात आयी कि ये वही अंग्रेज है जो 1947 में भी ऐसे है पाकिस्तान और भारत को छोड़ कर चली गयी थी ऐसी ही टकराव कि स्तिथि बना कर.. मुझे गुस्सा आ रहा था इंग्लैंड कि बातो पर तभी ख्याल आया कि हम तब भी जीते थे हम अब भी जीतेंगे।
लेकिन जब बात होती है हमारे देशभक्तो कि तो वो सोशल साइट्स पर वॉर में आगे रहती है इसलिए बॉर्डर पर ना सही लेकिन क्रिकेट के मैदान पर युद्ध ना ना धर्मयुद्ध देख पाएंगे । हम जीतेंगे जरूर यकीन रखियेगा। बल्ला किसी का भी चलेंगे जीतेंगे हम ही, क्यूंकि विराट सेना भी अब पाकिस्तान कि नियत से वाकिफ है… बस जनाब कल तक का वेट कर लीजिये.

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