जहाँ एक तरफ भाजपा MCD में अपने द्वारा किये गए कामों को गिनाने में पूरी तरह से नाकामयाब रही है, वहीँ आम आदमी पार्टी की केजरीवाल सरकार ने 2 सालों में दिल्ली में ढेरों जन-कल्याण के काम किये और लोगों की खूब वाह-वाही बटोरी। जहाँ भाजपा के शासन में MCD की हालत बद से बदतर होती चली गयी, वहीं दिल्ली सरकार का बजट 30,000 करोड़ से बढ़कर 46,000 करोड़ पहुँच गया। दिल्ली सरकार जनता के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्चे कर रही हैं और पिछले २ सालों में दिल्ली में हुआ रिकॉर्ड वैट कलेक्शन यह बताता है कि अगर सरकार ईमानदारी से
काम करें तो किस तरह प्रदेश की सूरत बदली जा सकती है ।

टीम एजाइल रख रही है आपके सामने केजरीवाल सरकार द्वारा किये गए 10 काम जिसकी तारीफ विरोधी भी कर रहे हैं :-

1. मुफ्त पानी :

आप ने अपने घोषणापत्र में हर परिवार को 20 हजार लीटर पानी मुफ्त देने का वादा किया था जो सरकार बनाने के पहले ही हफ्ते में पूरा कर दिया | मीडिया और विपक्ष ने तब कहा था की इस से दिल्ली जल  बोर्ड का भट्ठा बैठ जायेगा पर इसके उलट एक साल में 178 करोड़ का मुनाफा कमा कर  दिल्ली सरकार ने अपने विरोधियों के मुँह पर ताला लगा दिया |

 

2. बिजली बिल में 50 % की कटौती :

केजरीवाल ने सरकार बनाते ही ऐलान किया कि दिल्ली में 0 से 200 और 201 से 400 युनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को बिजली बिल आधा ही भरना होगा। बाकी का आधा हिस्सा दिल्ली सरकार की सब्सिडी से पूरा होगा। दिल्ली की 28 लाख जनता को इससे फायदा होगा। दिल्ली सरकार द्वारा बिजली दरों में सब्सिडी के माध्यम से 50 फीसदी कटौती से उपभोक्ताओं का बिजली का बिल तो घटा, साथ ही दिल्ली में बिजली की खपत में बढ़ोतरी की दर भी धीमी पड़ गई। सब्सिडी का लाभ लेने के लिए घरेलू श्रेणी के उपभोक्ता बिजली का उपयोग किफायत से कर रहे हैं। दिल्ली में दो साल पहले तक बिजली की खपत 6 से 8 फीसदी की दर से थी, जो अब 2 फीसदी से नीचे चली गई हैं। दो साल पहले जो उपभोक्ता 400-450 यूनिट बिजली की खपत करते थे, वहीं अब बिजली सब्सिडी का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट से कम बिजली की खपत कर रहे हैं। दिल्ली सरकार के दो साल के कार्यकाल में बीते 15 वर्षों की तुलना में सबसे कम बिजली की कटौती हुई है। दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घरेलू श्रेणी में वर्ष 2013-14 में बिजली की खपत 7.5 फीसदी थी जो वर्ष 2014-15 में 6.70 फीसदी बढ़ गई थी, जबकि वर्ष 2015-16 में बिजली की खपत
महज 1.4 फीसदी बढ़ी हैं। अधिकारी ने कहा, “चालू वित्त वर्ष में भी बिजली की खपत में बढ़ोतरी 2 फीसदी से कम ही रहने की संभावना है”।

 

3. मोहल्ला क्लीनिक :

भारत के इतिहास में मोहल्ला क्लिनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में किसी भी क्रांति से कम नहीं है, जिसने न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी ख्याति बटोरी हैं। केजरीवाल ने कहा, ‘मोहल्ला क्लिनिकों (आम आदमी क्लिनिक) में आने वाले लोगों की 97 प्रतिशत बीमारियाँ ठीक कर दी जाती हैं। बाकी तीन प्रतिशत को अस्पतालों के लिए रिफ़र कर दिया जाता है। इन क्लिनिकों और पॉली क्लिनिकों ने डिस्पेंसरियों की जगह ले ली है’। उन्होंने कहा कि इस समय ऐसे 100 क्लिनिक परिचालन में हैं और
31 दिसंबर तक इस तरह की करीब 1,000 इकाइयाँ शुरू की जाएँगी। प्रत्येक म्यूनिसिपल वार्ड में इस तरह के औसतन तीन से चार क्लीनिक होंगे ।

 

4. दिल्ली की सरकारी स्कूल :

शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में दिल्ली के सरकारी विद्यालयों का कायापलट ही हो गया। दिल्ली सरकार अपने कुल बजट का 25% सिर्फ शिक्षा पर खर्चा कर रही है, जो भारत देश में किसी भी राज्य से कही ज्यादा है। दिल्ली सरकार ने केंद्र द्वारा जमीन न दिए जाने का तोड़ निकाला और मौजूदा विद्यालयों में अतिरिक्त क्लासरूम की व्यस्था की। सरकार ने जहाँ 2 साल में 8000 क्लासरूम बनाये, वही 25 से ज्यादा सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए विद्यालय बनाये।

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