लोकसभा चुनाव के बाद जिस दिल्ली ने मोदी को झटका दिया था आज फिर वही दिल्ली ने आप को झटका दिया है, वजह जो भी हो ये मंथन का विषय जरूर है की आखिर दो वर्षो में ऐसा क्या हुआ ।

हालांकि लोकसभा इलेक्शन में अभी २ साल का वक़्त है लेकिन सियासत के इस गली में ये चर्चा शुरू हो चुकी है की दिशा किस ओर है।
अभी ऐसा कहना जल्दबाज़ी हो सकता है लेकिन ये पूरी तरह असत्य भी नहीं है की बीजेपी के मोदी लहर की हवा कितनी तेज़ है औऱ इलेक्शन के साथ ये लहर बढ़ती जा रही है । इसका कारण सिर्फ ये नहीं है की बीजेपी कोई विशेष डेवलपमेंट या करिश्मा कर चुकी है, लेकिन मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सियासत एक पुरानी अफसरबाज़ी औऱ बेपरवाही की सामान्य दिनचर्या में अंकुश लगाती दिख रही है यही कारण है की लोग एक उम्मीद के साथ बीजेपी के साथ बढ़ रही है ।
औऱ एक मुख्य कारण विपक्ष की वही पुरानी आदत, बेवजह की राजनीति लोगो को रास नहीं आ रही ।
लोग ऊब गए है, लोग थक गए है, बस हारे नहीं है, बस उम्मीद पर है की कोई तो होगा जो भारत के विकास की नाव को आगे ले जाएगा ।
ये उम्मीद लोगो को मोदी के ईंमानदार छवि से मिलती है, एक विश्वास सी मिलती है, जब मेने भिन्न-भिन्न शहरों के लोगो से पूछा की आखिर मोदी का नाम क्यों आता है  जब हम बीजेपी के बारे में पूछते है .. तो इसका जवाब हमें अपना सवाल में ही मिला राष्ट्रीय नेता वही होता है जिसका अपना कोई एजेंडा पहचान वजूद होता है, मोदी जी के आगे बढ़ने की गाथा अपने मुख्यमंत्री होने के दौरान ही गढ़ दी थी, लोग अपनी पहचान औऱ नाम अपने काम औऱ रास्ते से बनता है औऱ मोदी जी ने बखूबी ही अपना वजूद का कृतिमान वही से बना लिया था ।
लेकिन फिर भी ये देखना दिलचस्प होगा की आप पार्टी का ईवीएम वाला एक्सक्यूज़ काम आता है या फिर ये केजरीवाल साहब को ले डूबेगी । ये मेरे खुद के विचार है…………….

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