नर्क. यही नाम दिया जा सकता है उस जगह को जिसे महज़ याद करके भी लिम ही-जिन के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. लिम नॉर्थ कोरिया के कंसंट्रेशन कैंप में गार्ड थी. उसने वहां जो देखा वो आज तक उसे विचलित करता है. उसको ऐसा मानसिक आघात पहुंचा था कि कई दिनों तक वो ढंग से ख़ाना भी नहीं खा पाती थी.

2 लड़के कैंप से भाग गए थे. उसका बदला उनके परिवार के 7 लोगों को मार कर लिया गया. कुछ हफ़्तों बाद उन्हें फिर से पकड़ लिया गया. बुरी तरह से पिटाई के बाद सबके सामने उनकी गर्दन उड़ा दी गई. बाकी कैदियों को वो दृश्य देखने के लिए मजबूर किया गया. लिम बताती हैं कि ऐसा उनको ये सबक सिखाने के लिए किया गया. कि भागने का अंजाम क्या हो सकता है. कैदियों को उनकी लाशों पर पत्थर बरसाने को भी कहा गया.

इस घटना ने लिम को, जो तब 20 साल की थी, ज़हनी तौर पर तोड़ कर रख दिया. और ये सिर्फ एक घटना नहीं थी. अपनी सात साल की ड्यूटी में उसे ऐसे बहुतेरे नज़ारे और करने थे. ऐसे नज़ारे जिनमें जान लेने, टॉर्चर करने और राजनितिक कैदियों का रेप करने जैसी घटनाएं शामिल थी. एक लड़की को नंगी करके परेड़ कराई गई और उसके बाद उसे ज़िंदा जला दिया गया. महज़ इसलिए कि उसने पूछताछ के दौरान गार्ड को इरिटेट कर दिया था. लिम कहती हैं, “वो लोग कैदियों को इंसान मानते ही नहीं थे. जानवरों जैसा बर्ताव करते थे.”

कैंप की एक महिला गार्ड.

अब लिम नॉर्थ कोरिया के उन दहशतनाक लेबर कैंप्स के अंदरूनी हालात उजागर कर रही है जहां, एक अनुमान के अनुसार, 2 लाख से ज़्यादा कैदी हैं. लिम पहली महिला गार्ड है जो खुल के अपने अनुभव बता रही है. वो कहती है,

“हमें इस तरह ट्रेन किया जाता था कि कैदियों के लिए हमारे दिल में कोई सहानुभूति पैदा न हो. हमें बताया जाता था कि इन लोगों ने भयानक क्राइम किए हैं. इनके साथ कैसा भी सुलूक जायज़ है. अब जब मुझे पता है कि वो सब नॉर्मल लोग हैं, तो मुझे बहुत अपराधी महसूस होता है.”

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के ये कैंप हिटलर के कैंप से किसी तरह कम नहीं हैं. उन्हीं की तर्ज पर यहां इंसानों की हैसियत कीड़े-मकौड़ों से बदतर है. कैदियों से ठंडे जंगलों और गहरी खदानों में बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के कमरतोड़ मेहनत कराई जाती है. कैदी हमेशा दहशत में रहते हैं. बिना वजह पिटाई की दहशत, पहले से कम मिलते खाने में और भी कटौती की दहशत. ज़ख़्मी लोगों को बर्फ़ में मरने के लिए छोड़ दिया जाता है. खदानों में हुई दुर्घटनाओं में मरने वाले कैदियों की लाश कई-कई दिनों तक वहीं पड़ी रहती है. सड़ती रहती है. क़ैदी भूख से निजात पाने के लिए चूहे और सांप तक पकड़ कर खा जाते हैं.

कैदियों की एक दुर्लभ तस्वीर जो न जाने किस सोर्स से बाहर तक पहुंची.

सॅटेलाइट इमेजेस से इन कैंपों की महज़ झलक ही मिल पाती है. उनके अस्तित्व का पता चलता है. वहां असल में क्या होता है ये अब लिम जैसे लोगों की ज़ुबानी सुनने को मिल रहा है. लिम ने चीन की सीमा के पास बने कैंप-12 से अपना काम शुरू किया था. गार्ड्स की ब्रेनवॉशिंग पहले ही दिन से की जाती थी. ये बात उनके मन में ठूस-ठूस के भरी जाती थी कि ये कैदी इंसान नहीं हैं. अगर किसी गार्ड की गाड़ी ने किसी बच्चे को भी कुचल दिया, तब भी सज़ा नहीं मिलेगी.

सॅटेलाइट से ली गई तस्वीर.

लिम ने जहां काम किया वहां ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. मर्दों को खदानों में बेइंतेहा लेबर वर्क करने के लिए भेज दिया जाता था. जहां उनकी जान की कोई गारंटी नहीं होती थी. लिम बताती है, “एक बार एक खदान में विस्फोट हो गया था. 300 लोग तुरंत मर गए. बचे हुए लोग बाहर निकल पाते इससे पहले ही गार्ड्स ने खदान को बंद कर दिया. वो आग और गैस को फैलने से रोकना चाहते थे.”

सैंकड़ों लोग उन सुरंगों में मर चुके हैं, जहां परमाणु हथियारों की टेस्टिंग होती है. पुरुष गार्ड जब चाहे तब किसी भी महिला से रेप करते हैं. किसी की ना कहने की हिमत नहीं होती है. अगर कोई महिला प्रेग्नेंट हो जाती है, तो उसका तुरंत एबॉर्शन करवाया जाता है. अगर प्रेग्नेंसी ज़्यादा एडवांस्ड स्टेज पर है, तो महिला को ज़हरीला इंजेक्शन देकर मार दिया जाता है.

पेट्रोलिंग करते कैंप के गार्ड्स.

कैदियों से हफ्ते के सातों दिन काम करवाया जाता है. वो सुबह 5 बजे उठते हैं और अगले 16 घंटों तक काम करते हैं. लिम बताती है कि मरने के बाद भी कैदियों के साथ मानवीय बर्ताव नहीं किया जाता. लाशों का एक तरफ ढेर लगता रहता है. कोई संवेदना नहीं. कोई अंतिम संस्कार नहीं. हफ्ते बाद उन्हें इकठ्ठा फूंक दिया जाता है. किसी हॉरर फिल्म जैसा नज़ारा होता है.

यहां ऐसे कैदी भी हैं जिन्हें पता ही नहीं उनका कसूर क्या है? कुछेक को तो बिल्कुल बेतुकी वजहों से पकड़ लाया गया है. जैसे ‘सुप्रीम लीडर’ की तस्वीर पर धूल जमने दी, किसी धार्मिक सभा में हिस्सा लिया या विदेशी रेडियो स्टेशन सुन लिया वगैरह-वगैरह.

किम जोंग उन.

कैदियों को आपस में हमदर्दी दिखाने की भी इजाज़त नहीं है. हमदर्दी आपकी अपनी सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है. एक बार एक कैदी ने एक बच्चे को देखा जो बेहद कमज़ोर लग रहा था. उसने एक गार्ड को सलाह दी कि वो बच्चे को उस स्पेशल एरिया में भेज दे, जहां उसका इलाज हो सके. गार्ड ने उसे बुरी तरह धुन दिया. गार्ड ने उससे बार-बार पूछा कि वो होता कौन है दूसरों के लिए फैसले लेने वाला? कमज़ोर कैदी जब जंगल में पेड़ काटने के काम पर लगाए जाते हैं, तो कई बार वो हिलडुल में भी असमर्थ होते हैं. ऐसे में कट के ज़मीन पर गिरते पेड़ की चपेट में आ जाते हैं. लोगों को यूं कुचला जाता देख गार्ड्स को मज़ा आता है.

इन अमानवीय कैंपों के बारे में पूरा कोरिया जानता है. इनकी बेहद दहशत है वहां. किम जोंग उन को हिटलर और स्टॅलिन का आधुनिक संस्करण कहा जा रहा है. लिम को डर है कि उसके कैंप छोड़ने के बाद हालात और भी बदतर हो गए होंगे.

वो कहती है,

“मैं अपने लीडर्स द्वारा बोले गए झूठ से खुद को ठगा हुआ महसूस करती हूं. हमें बोला गया था कि इन लोगों को इंसान नहीं मानना है. अब मैं मानसिक रूप से ध्वस्त हो चुकी हूं.”

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