खान शेखून (सीरिया)
बच्चों को प्यार करते हुए उन्हें अपनी गोद में उठाना-पुचकारना सामान्य है और इसमें सुकून है। अपने मरे हुए बच्चों का शव थामे उन्हें जमीन में दफन करना, ना तो सामान्य है और ना ही इसमें सुकून है। ठीक ही कहते हैं कि ताबूत जितना छोटा होता है, उसका दर्द उतना ही ज्यादा होता है। अब्देल हमीद अल-यूसुफ ने जब अपने 9 महीने के जुड़वा बच्चों- अया और अहमद को अपनी दोनों बांहों में सीने के अगल-बगल थामे हुए थे, उस घड़ी दुनिया की कोई बात अल-यूसुफ को राहत नहीं दे सकती थी। दोनों बच्चों का शव थामे अल-यूसुफ कभी बिलखकर रोते, तभी उनके बालों को प्यार से सहलाते और फिर आंसू में डूब जाते। दोनों बच्चों के शव को जमीन में गाड़ते हुए अल-यूसुफ के होंठ कापें और एक बुदबुहाट सी निकली, जो कह रही थी, ‘अलविदा कहो बच्चों, कहो अलविदा।’

अल-यूसुफ की तकलीफ बस इतने पर खत्म नहीं हुई। मंगलवार को सीरिया के इदलिब प्रांत स्थित खान शेखून शहर में हुए रसायनिक हमले में उनके परिवार के 22 सदस्य मारे गए। अल-यूसुफ ने उन सबों को एक बड़ी सी कब्र में एकसाथ दफन कर दिया। इसी कब्र में अपने रिश्तेदारों के साथ अया और अहमद की भी लाशें दफन कर दी गईं। इस हमले में 80 से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई। मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद बच्चों की है। मृतकों में 30 बच्चे और 20 महिलाएं शामिल हैं। अल-यूसुफ परिवार इस शहर के सबसे बड़े खानदानों में से एक था। हमले ने इसके 22 सदस्यों की जान लेकर खानदान को ही छोटा कर दिया। इसी परिवार की एक अन्य सदस्य अया फदल बताती हैं कि हमले के बाद अपने 20 महीने के बेटे को गोद में लेकर वह घर से बाहर भागीं। उन्हें लगा था कि बाहर गली में जाने पर जहरीली गैस से उनकी हिफाजत होगी। अया ने जो सोचा था, वैसा बिल्कुल नहीं हुआ। बाहर लाशें बिछी थीं। एक पिक-अप ट्रक ने आकर लाशों को भरा। इनमें अया के अपने रिश्तेदार और छात्र भी थे। 25 साल की अया अंग्रेजी की शिक्षिका हैं।                                                                                                                                                       

अपने बच्चों की लाश थामे अल-यूसूफ।

अपने इतने सारे रिश्तेदारों की लाशों को देखकर अया के तो जैसे होश ही उड़ गए। वह रोते-रोते सबके नाम पुकारती जा रही थीं, तो कभी उन्हें पकड़कर झकझोर रही थीं। अया उन्हें याद करके अब भी रो रही हैं, उनके जख्म अब भी बहुत ताजा हैं। वह कहती हैं, ‘अम्मर, अया, मुहम्मद, अहमद, मेरे बच्चों मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। वे सारे बच्चे पंछियों जैसे ही तो थे। चाची सना, चाचा यासिर, अब्दुल करीम, मेरी आवाज सुनिए।’ अया की आंखों में जैसे उन लाशों की तस्वीर खिंच गई है। याद करते हुए वह कहती हैं, ‘मैंने उन्हें देखा। वे सब मर गए थे। अब सभी मर गए हैं।’ मालूम हो कि मंगलवार को हुए इस रसायनिक हमले ने इस छोटे से शहर की शक्ल बिगाड़ दी है। यहां सड़कों, घरों और गलियों में जैसे हर कहीं मातम का ही माहौल है।

पिछले 6 साल से चल रहे गृहयुद्ध में इन लोगों ने क्या कुछ नहीं झेला, लेकिन मंगलवार को हुए हमले ने इन्हें जैसे सुन्न कर दिया है। जिस इलाके में हमला हुआ, वह विरोधी गुट के कब्जे में है। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता के खिलाफ 6 साल पहले यहां गृहयुद्ध शुरू हुआ था। रूस भी इस लड़ाई में असद सरकार के साथ है। रूस के साथ आने के बाद से ही असद सरकार की स्थिति ज्यादा मजबूत हो गई है। इस हमले पर प्रतिक्रिया करते हुए अमेरिका ने भी चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त राष्ट्र सीरिया पर कार्रवाई नहीं करता, तो वह इस मामले को अपने हाथ में लेकर कदम उठाएगा।

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