दो साध्वियों से रेप के मामले में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम का अब जेल से निकलना काफी मुश्किल होगा. ऐसे में यह सवाल उठा कि गुरमीत राम रहीम के जेल में होने के कारण अब डेरा सच्चा सौदा की बागडोर किसके हाथ में दी जाएगी. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक डेरा सच्चा सौदा इस वक्त 3 बड़े गुटों में बंट चुका है. डेरा सच्चा सौदा के पास करोड़ों की जायदाद और संपत्ति है. इस पर मालिकाना हक पाने की लड़ाई में राम रहीम के करीबी गुटों में बंट गए हैं.

डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 1948 में शाह मस्ताना महाराज ने की थी. शाह मस्ताना महाराज के बाद डेरा की गद्दी शाह सतनाम महाराज ने संभाली. उन्होंने साल 1990 में अपने अनुयायी गुरमीत सिंह को गद्दी सौंप दी.
इसके बाद संत गुरमीत राम का नाम संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा कर दिया गया. सिरसा में डेरा की करीब 700 एकड़ जमीन है. इसके अलावा तीन अस्पताल, एक इंटरनेशनल आई बैंक, गैस स्टेशन और मार्केट कॉम्प्लेक्स के अलावा दुनियाभर में करीब 250 आश्रम हैं.

राम रहीम के परिवार पर नजर डालें तो उसका एक बेटा जसमीत सिंह, दो बेटियां चरणप्रीत और अमनप्रीत हैं. एक गोद ली हुई बेटी हनीप्रीत भी है. डेरा प्रमुख राम रहीम की मां नसीब कौर, पत्नी हरप्रीत कौर बेटी अमनप्रीत कौर, चरणप्रीत कौर बेटा जसमीत सिंह है. सूत्रों के अनुसार सारे परिवार का जोर जसमीत को मुखिया बनाने में लगा हुआ है और ये अहम फैसला बाबा ओर उनकी कमेटी के लोगों को लेना है.


मां और पत्नी ने रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम से मुलाकात करने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं ताकि जसमीत को डेरे का सारा कार्यभार सौंपने का ऐलान आधिकारिक तौर पर कराया जा सके. परिवार के लोग कमेटी के लोगों को भी मनाने में लगे हुए हैं. मुखिया का बेटा होने के नाते डेरा के उत्‍तराधिकारी बनने का सबसे पहला मौका जसमीत को मिल सकता है. बताते हैं कि गुरमीत ने 2007 में जसमीत को अपना उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा की थी जब सीबीआई ने गुरमीत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.

जसमीत का हालांकि मुखिया बनना इतना आसान नहीं है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है डेरा का एक नियम. नियम के मुताबिक डेरा का अगला प्रमुख मौजूदा प्रमुख के परिवार या खानदान से नहीं हो सकता है. ऐसे में जसमीत के डेरा प्रमुख बनने में यह नियम रोड़ा बन सकता है. जसमीत इंसान के पास अपने ससुर और पंजाब के सीनियर कांग्रेस लीडर हरमिंदर सिंह जस्सी का समर्थन भी है. हरमिंदर सिंह जस्सी राम रहीम के बेहद करीबी है और वह चाहते हैं कि डेरा सच्चा सौदा का कार्यभार संभालने की जिम्मेदारी जसमीत और खुद उन्‍हें मिल जाए.

दूसरी दावेदार हैं राम रहीम की खास शिष्‍या और डेरा सच्चा सौदा की चेयरपर्सन विपसना इंसा. 35 साल की गुरु ब्रह्मचारी विपसना कई वर्षों से डेरा से जुड़ी रही हैं. विपसना डेरा में दूसरे स्थान पर मानी जाती हैं. वे ही हैं जिनके पास अपनी ओर से चीजों पर फैसला करने का एकमात्र अधिकार है. विपसना ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई डेरा द्वारा चलाए जाने वाले गर्ल्स कॉलेज से ही पूरी की है. विपसना के नीचे 250 लोगों की टीम काम करती है जिसमें से करीब 150 महिलाएं हैं.

विपसना के पास प्लस पॉइंट ये है कि डेरे की मैनेजमेंट कमेटी से जुड़े कई मेंबर चाहते हैं कि डेरा सच्चा सौदा अपने उस नियम पर कायम रहे जिसके तहत गद्दी पर बैठे डेरा प्रमुख के परिवार का कोई भी व्यक्ति डेरे का उत्तराधिकारी नहीं बनाया जा सकता. साथ ही अपनी साफ छवि की वजह से विपसना को डेरा की मैनेजमेंट कमेटी के कई मेंबर्स का समर्थन भी हासिल हो रहा है.

अगर विपसना को डेरा की कमान नहीं सौंपी जाती, तो एक और दावेदार है इस लिस्‍ट में. वो हैं राम रहीम की गोद ली हुई बेटी हनीप्रीत. 25 अगस्‍त को पंचकूला में राम रहीम के साथ साये की तरह साथ रहीं हनीप्रीत अपने दत्तक पिता की काफी लाडली हैं. हनीप्रीत भी विपसना की तरह ही गुरु ब्रह्मचारी हैं. वो पिछले सात सालों से डेरा प्रमुख के साथ हैं और उनकी खास मानी जाती हैं. हनीप्रीत गुरमीत राम रहीम की सभी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं. अगर डेरा प्रमुख अपनी सहमति देते हैं तो हनीप्रीत भी सत्ता संभाल सकती हैं.

हनीप्रीत इंसा गुरमीत राम रहीम की गोद ली हुई बेटी हैं। इस वजह से इनकी नियुक्ति में डेरा प्रमुख के चयन का ऊपर लिखा परिवार वाला नियम भी आड़े नहीं आता है. सूत्रों के मुताबिक राम रहीम चाहता है कि वह जब तक जेल में रहे हनीप्रीत को पूरे डेरे की बागडोर सौंप दी जाए और तमाम फैसले भी हनीप्रीत जेल में आकर उससे बातचीत करने के बाद ही लें. साथ ही राम रहीम को लगता है कि हनीप्रीत उसकी काफी विश्वासपात्र है. अगर हनीप्रीत को डेरे की बागडोर मिलती है तो फिर डेरा सच्चा सौदा की तरफ से राम रहीम को जेल से निकालने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आएगी.

कुल मिलाकर गुरमीत राम रहीम का परिवार यह नहीं चाहता कि डेरा सच्चा सौदा की करोड़ों की जायदाद और जमा पूंजी किसी ऐसे व्यक्ति के पास चली जाए जो की गुरमीत राम रहीम के परिवार से नहीं है. उन्हें यह भी डर है कि अगर कुछ साल बाद गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आने में कामयाब हो गया तो ऐसे में वह परिवार को दरकिनार कर सकता है. इसी वजह से परिवार डेरा सच्चा सौदा का कब्जा अपने ही किसी सदस्य के पास रखने का इच्छुक है.

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