ऐसा लगता है कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का साम्राज्य अब भी बरकरार है। अगर बाबा की इजाजत होगी तभी कुछ होगा वरना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। इसकी बानगी रोहतक की सुनारिया जेल में देखने को मिल रही है जहां के अफसरों को आरटीआई के जरिए जानकारी देने के लिए बाबा की इजाजत चाहिए।

दरअसल, जेल में बंद गुरमीत राम रहीम क्या खाता है, क्या पहनता है और उसे क्या सुविधा मिली हुई है…ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब जानने के लिए एक आरटीआई डाली गई। जेल प्रशासन ने थर्ड पार्टी द्वारा मांगी गई सूचनाओं पर सीधे जवाब देने की बजाए इस बारे में सबसे पहले गुरमीत राम रहीम से ही पूछ लिया है कि यह सूचनाएं दी जाए या नहीं दी जानी चाहिए। इस पर उनसे सात दिन में सहमति/असहमति मांगी गई है। इसकी प्रति आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर को भी भेज दी गई है।

हालांकि सरकार गुरमीत राम रहीम को वीवीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने को नकार चुकी है, लेकिन नए सिरे से चलाई कसरत खासी सुर्खियां बटोरती हुई नजर आ रही है।

इधर, पीपी कपूर जेल प्रशासन की इस चिट्ठी से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे और उनका तर्क है कि जेल जनता के पैसे से चल रही है न कि कैदी गुरमीत सिंह के खर्चे से चलती है। इसलिए जनता को यह जानने का हक है। उनका आरोप है कि सरकार से प्राप्त संरक्षण के कारण जेल अधीक्षक व्यापक सार्वजनिक हित की इस सूचना को सार्वजनिक करने में अड़ंगे लगा रहे हैं। जबकि आमजन में चर्चा है कि बलात्कार के जुर्म में 20 साल की सजा काट रहे कैदी गुरमीत सिंह को नियमों के विरूद्ध वीआईपी सुविधाएं दी जा रही हैं। पोल खुलने के भय से हरियाणा सरकार इसे सार्वजनिक नहीं कर रही है।
उल्लेखनीय है कि जेल में बंद गुरमीत राम रहीम की दिनचर्या सबकी दिलचस्पी का विषय बनी हुई है। हर कोई यह जानना चाहता है कि एक समय गुरमीत राम रहीम के सामने दंडवत दिखाई देने वाली बीजेपी सरकार सजायाफ्ता गुरमीत राम रहीम को जेल में क्या सुविधाएं दे रही है। हालांकि, सरकार शुरू से गुरमीत राम रहीम को वीवीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने के आरोपों को नकार चुकी है।

अब इस मामले में सामने आई आरटीआई पर गुरमीत राम रहीम का जवाब खासा अहम होगा। मांगी गई सूचना के तहत पूछा गया था कि कैदी गुरमीत को किस श्रेणी की सुविधाएं प्राप्त हैं, खाने का मैन्यु क्या है, खाने पर खर्च राशि व जेल प्रशासन ने इसे कितने बर्तन, कपड़े, बिस्तर, ड्रेस, कुर्सी, बेड, फर्नीचर क्या-क्या दिया है।

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